यास का ‘कुंजर’ केरल, बारिश देर से आ रही है

SFVS Team: – यास का ‘कुंजर’ केरल, बारिश देर से आ रही है
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यास का 'कुंजर' केरल, बारिश देर से आ रही है

फ़ाइल छवि

कमलेश चौधरी: तूफान! यास सिर्फ बंगाल और उड़ीसा में तबाही मचाने तक ही सीमित नहीं रहे। भले ही वह दूरगामी हो। निर्धारित समय 1 जून नहीं है, बल्कि 3 जून को मुख्य भूमि में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं का आगमन है। यानी दो दिन लेट!

हालांकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहले भी बारिश हो चुकी है, लेकिन मौसम विज्ञानी अभी भी केरल की ओर देख रहे हैं। क्योंकि, जैसे ही मानसून दक्षिणी राज्य में प्रवेश करता है, मुख्य भूमि में ‘मुख्य भूमि की शुरुआत’ घोषित कर दी जाती है। उसके बाद बारिश धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गई। इस बार मौसम भवन ने कहा, 31 मई को बारिश हो सकती है। लेकिन चक्रवात ने पूर्वानुमान से मेल खाने का मौका नहीं दिया।

बारिश में कांटे क्यों ?

मौसम विज्ञानियों के अनुसार इसके लिए यस के निर्माण का समय और उसका प्रक्षेपवक्र दोनों ही जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार मानसूनी हवाओं का प्रवाह हर कुछ दिनों में तेज होता जाता है। मूसलाधार बारिश जो यास के हाथ से तेज हुई थी, अंडमान में पहले ही घुस चुकी है। लेकिन अब बारिश फिर से कमजोर हो गई है। अगले मजबूत प्रवाह को आने में समय लग रहा है। हालांकि इस बीच मॉनसून के केरल में प्रवेश करने की संभावना है। इसलिए रास्ते में देर हो रही है।

मौसम भवन के उप महानिदेशक संजीव बंद्योपाध्याय ने यस के निर्देश पर टिप्पणी की। नतीजतन, केरल में मानसूनी हवाएं तेज नहीं हो सकीं। यह स्थिति शायद नहीं होती यदि यास पूर्व की ओर मुड़कर म्यांमार या बांग्लादेश चला जाता।

चक्रवात अम्पन ने हालांकि बारिश के मौसम में कांटे नहीं फैलाए। इसका एक कारण पहले की उपस्थिति भी है। इसलिए मानसून ने ठीक 1 जून को केरल में ठीक समय पर प्रवेश किया। अरब सागर में मानसूनी हवाओं के प्रवाह को मजबूत करने के लिए एक चक्रवात ने भी मदद का हाथ बढ़ाया। इस बार कर्नाटक के तट से दूर अरब सागर का बवंडर। इससे एक जून से मानसूनी हवाओं का प्रभाव फिर से शुरू होने की संभावना है। ऐसी अनुकूल परिस्थितियों के संकेत मिलने के बाद मौसम भवन ने कहा कि केरल में संभावित आगमन 3 जून को है। मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी घाट से सटे राज्यों में अगले पांच दिनों में बारिश बढ़ सकती है। यदि दक्षिण-पश्चिमी हवाएं तेज होती हैं, तो उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी भारी बारिश शुरू हो सकती है।

जैसे ही बंगाल के लोग सवाल करते हैं कि क्या देरी केरल को भी प्रभावित कर सकती है?

मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल में मानसून के आगमन का केरल या केरल के अंडमान से कोई सीधा संबंध नहीं है। संजीव बाबू के शब्दों में, ‘इस बार अंडमान सागर में, निर्धारित समय से एक दिन पहले, 21 मई को बारिश ने प्रवेश किया है। हालांकि केरल में देर हो रही है। नतीजतन, बंगाल में क्या होगा, अभी कहा नहीं जा सकता। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि जून में हवा कैसे चलती है।’

मौसम भवन के नए कैलेंडर के मुताबिक 7 जून को मानसून का आगमन उत्तर बंगाल में है। दक्षिण बंगाल में 10 जून। 11 जून कलकत्ता में। पूरे बंगाल को 15 जून तक कवर किया जाना है। सोने में सोहागा अगर तट के पास एक मजबूत भंवर या अवसाद होता है। अंत में क्या होगा यह तो समय ही बताएगा।

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